Saturday, April 19, 2014

सियासत

यह देखकर जनाजे के फूल भी हैरान हो गए,
कि अब शहीद भी हिन्दू और मुसलमान हो गए ||
लहू जो बिखरता है अपने देश की सरहदों पर, 
उसके रंग भी राम और रहमान हो गये ||

सियासत की चालों को कोई समझ न पाया,
खद्दर की खोल में सब शैतान हो गये ||
शहरे दिलों में जहां कभी जश्न रहता था,
वहां हरे और केसरिया मकान हो गये ||

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