पहचान..
किसी ने अच्छा तो किसी ने बुरा जाना मुझे।
अपनी अपनी तरह से सबने पहचाना मुझे।।
ऑफ़िस की प्रोग्रामिंग्स, मीटिंग्स, रिपोर्ट्स और जिन्दगी की भागमभाग से दूर कुछ क्षण अपनी प्रिय कवितावों, शायरी और गज़लों के साथ ।
कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल कि कहानी कह देंगे,
मैं पीडा का राज कुंवर हूँ, तुम शहजादी रूपनगर की,
आँसू को बहुत समझाया तनहाई मे आया करो,
Well, after a long time some addition here....
After a long time, I was reading some Hindi poems and found these lines very nice.
वो श्वेत वस्त्र कि श्वेता थी,
वो चन्द्रमुखी सुरबाला थी ।
वही हर्षिता वही दर्शिता,
नयनों में छलकती हाला थी ।
इक दो बूँद नही,
वो पूरी मधुशाला थी ।
कैसे करता मैं प्रणय निवेदन,
मै भिक्षुक वो रानी थी ।
अल्प समय का अल्प मिलन था आधी प्रेम कहानी थी॥
हम किस गली जा रहे हैं ।